Friday, April 4, 2025

श्री हनुमान जी की आरती

 ॥ श्री हनुमान जी की आरती ।। 

आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की।

जाके बल से गिरिवर काँपै, रोग दोष जाके निकट न झाँकै । 

अंजनि पुत्र महा बलदाई, संतन के प्रभु सदा सहाई। 

बीड़ा रघुनाथ पठाये, लंका जारि सिया सुधि लाये। 

लंका सो कोटि समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई। 

लंका जारि असुर संहारे, सियाराम जी के काज संवारे। 

लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे, आनि संजीवन प्राण उबारे। 

पैठि पाताल तोरि जमकारे, अहिरावण की भुजा उखारे।

 बायें भुजा असुर दल मारे, दाहिने भुजा सन्त जन तारे।

 सुर नर मुनि जन आरती उतारें, जै जै जै हनुमान जी उचारें।

 कंचन थाल कपूर लौ छाई, आरति करत अंजना माई।

 जो हनुमानजी की आरती गावैं, बसि बैकुण्ठ अमर पद पावैं। 

लंक विध्वंस किये रघुराई, तुलसी दास स्वामी कीरति गाई।

श्री हनुमान जी की आरती

 ॥ श्री हनुमान जी की आरती ।।  आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की। जाके बल से गिरिवर काँपै, रोग दोष जाके निकट न झाँकै ।  अंजनि प...